Monday, 12 April, 2010

...............के आप मुझे कुबूल करों

अलाल्ह ! आज़ में फिर से अपनी ज़मीं पर खड़ा हूँ .....................
मेरे दोस्त मुझे युहीं संभाले रखना ....................... 
मृता जी मुझे माफ़ कर दो ...................बड़ा ही बदतमीज़ बच्चा हूँ तुम्हारा माँ ......................
 

4 comments:

  1. देर आए दुरुस्त आए ... WELCOME BACK ...

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  2. अमृता जी मुझे माफ़ कर दो ..

    kis amrita se mafi mangi ja rahi hai ....??

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  3. @ हरकीरत ' हीर' .............ज़रा कान इधर करो ........अमृता प्रीतम

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