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प्रेमांचल
प्रहरी हु तेरे आँचल का माँ पाषण में भी बसते हैं तेरे प्राण माँ "
Tuesday, 13 April 2010
तू ..............
मेरा इश्क़ तेरी ज़ुल्फ़ में कहीं उलझा हैं जानम
,
छत पर आ जाओ ,ज़रा अपनी जुल्फ़े संवार लो ,
कि फ़लक पर फिर कोई ग़ज़ल होगी ..................
..
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आदित्य आफ़ताब "इश्क़" aditya aaftab 'ishq'
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