Saturday 8 August 2009

मैं भी नेता जैसा ...........

इन दिनों मेरे मुल्क़ में किसान ,किसानी के अलावा खुदकुशी भी कर रहे हैं ,

..............................और हैं सियासी लोग यहाँ जो अब ज़िन्दगी के बाद मौत की भी सियासत करते हैं ,

चाहे हो मर्दाना याकि ज़नाना ज़िस्म उनका पर रुह से ये सियासतबाज़ हमको नपुंसक ही दिखते हैं ,

साठ लाख का एक-एक हाथी ,और अट्ठारह हज़ार क़र्ज़ किसान पर ,

मुल्क़ की तक़दीर यही हैं ,हम भी मल्टीनेशनल में जाब करते हैं ,

प्रेमचन्द्र की सालगिरह ,सावन जैसी सूखी-पाखी अभी निकल कर चली गयी ,

नाथूराम की मौत ने मुझको याद दिलाई प्रेमचन्द्र की ,वरना अरसा गुज़र गया हैं क्यों याद करू मैं प्रेमचन्द्र की ,

लिखते थे वे गल्प-कहानी पर मैं नहीं वैसा हिन्दुस्तानी ,

सर्विस-वर्विस करता हूँ मैं ,शादी-वादी बीबी-बच्चे ,इतना ही फ्यूचर देखा हैं ,अब करना हैं जुगाड़ मनी का ,

अरे भूल गया मैं तुम्हे बताना ,मेरे कांटेक्ट में भी हैं एक नेता (दरअसल नेता जी ),

उसकी थोडी अप्प्रोच लगेगी ,नाथूराम की ज़मीन मिलेगी ,

हाँ बदले में उनको पैसे भी दूंगा ,उसके भी बीबी-बच्चे हैं ,वो तो खुद मर कर चला गया ,

उनका फिर क़र्ज़ पटेगा ,ज़मीन का क्या हैं ,उनकी हो या मेरी ,

यह तो धरती माता हैं न , ऐसे ही संस्कार हैं मेरे ..........................