Saturday, 17 April, 2010

हथेली में दंतेवाडा

हथेली की लकीरें गुस्से से उबल रही हैं ............
बेशक इनमें कहीं किसी दंतेवाडा का ज़िक्र छुपा हुआ हैं ..........
साँसों के साथ अब हथेली भी सुलगती हैं ,
और सुलगती हुयी कोई भी हथेली कभी सामान्य नहीं रह पाती ..........
सोचता हूँ किसी आदिवासी कि ऐसे ही सुलगती हथेली बन्दूक पकड़ लेती हैं ..................