Tuesday, 13 April, 2010

तू ..............

मेरा इश्क़  तेरी ज़ुल्फ़ में कहीं उलझा हैं जानम ,
छत पर आ जाओ ,ज़रा अपनी जुल्फ़े संवार लो ,
कि फ़लक पर फिर कोई ग़ज़ल होगी ....................


9 comments:

  1. बहुत दिनों बाद तुम आये हो...चिंता में दाल कर चले जाते हो..
    बताया तो करो कहाँ हो !!
    बहुत ख़ुशी हुई तुम्हें देख कर....
    दीदी..

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  2. बहुत दिनों बाद तुम आये हो...चिंता में डाल कर चले जाते हो..
    बताया तो करो कहाँ हो !!
    बहुत ख़ुशी हुई तुम्हें देख कर....
    दीदी..

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  3. Kya bahiyya!
    Tumari lekhni ke baare mein:
    Dekhan mein chhotan lage,
    Ghav kare gambheer!

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  4. bahut khub...
    chhoti magar behtareen rachna.....
    mere blog par is baar..
    वो लम्हें जो शायद हमें याद न हों......
    jaroor aayein...

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  5. aapko hum kai dino se talashte rahe ,
    shukr hai ghar ka rasta to nazar ,aane ki ada bhi nirali rahi man ko bha gai ,aapko padhna achchha lagta hai hum to khud judna chahte hai is blog se .magar aap hai ki kabhi id aur kabhi dooj ka chand ban chhipe rahte hai .
    पर आ जाओ ,ज़रा अपनी जुल्फ़े संवार लो ,
    कि फ़लक पर फिर कोई ग़ज़ल होगी
    waah kya baat hai .dil ko chhoo gayi .

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  6. आदित्या..
    तुम्हारी नई जॉब कैसी है....?
    क्या रहा ...?


    कभी कहा नहीं तुमसे..पर तुम्हारे बारे में सोचा बहुत..

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  7. बहुत ग़ज़ब की बात कही है ...

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  8. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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