Wednesday 20 April 2011

पी लू .........तेरी नज़र से बस एक मुठ्ठी ज़ी लू

पिके मय का प्याल मै बदनाम हुआ- बेहोश हुआ ,धीरे धीरे आँखों से घूँट घूँट भर लेने दो,
ज़िस्म तड़पता हैं मेरा ,मेरे यौवन को रोने दो, सांसों में उलझा हैं जीवन ,
इन साँसों को थम जाने दो,,
एकाध  दफा तो यारो अब शमशान में भी सो जाने दो।।।।।।।।।।।।।।।। 
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1 comment:

  1. सादर आमंत्रण,
    आपका ब्लॉग 'हिंदी चिट्ठा संकलक' पर नहीं है,
    कृपया इसे शामिल कीजिए - http://goo.gl/7mRhq

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